पहचान: शायर, साहित्यकार और कथाकार
अलीम ताहिर (शेख अलीमुद्दीन अब्दुल रशीद) का जन्म महाराष्ट्र के जलगाँव ज़िले के धरनगाँव में हुआ। जबकि मालेगाँव (ज़िला नासिक) उनका दूसरा वतन और साहित्यिक एवं रचनात्मक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है।
उनके पिता अरशद मीनानगरी उर्दू, हिंदी और मराठी के प्रसिद्ध कवि और साहित्यकार हैं। साहित्यिक वातावरण में परवरिश पाने के कारण अलीम ताहिर को कम उम्र में ही कविता और साहित्य से गहरी रुचि हो गई। बचपन से ही मुशायरों में भाग लेने और अपने पिता से इस्लाह लेने का सिलसिला शुरू हुआ, जिसने उनकी काव्य चेतना को निखारा।
शैक्षिक दृष्टि से उन्होंने उर्दू, इतिहास और शिक्षा (Education) में एम.ए. की उपाधियाँ प्राप्त कीं। इसके अतिरिक्त बी.एड., डी.टी.एल. तथा पत्रकारिता में डिप्लोमा भी किया। “नई असनाफ़-ए-सुख़न” उनके पीएच.डी. शोध का विषय है।
अलीम ताहिर की साहित्यिक सेवाएँ कविता, कहानी, उपन्यास, आलोचना, शोध, निबंध लेखन और बाल साहित्य तक विस्तृत हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संबंधों, प्रेम, सामाजिक चेतना, सहानुभूति और समकालीन समस्याओं का गहरा प्रतिबिंब मिलता है। वे साहित्य को मानवता, संवाद और सांस्कृतिक सौहार्द को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम मानते हैं।
उनकी पचास से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें दुनिया मुसाफिर रास्ते, मंज़र पस-ए-मंज़र, शायरी, संगीत और नग़्मगी, औरत कच्चे कान की, एक चाय दो सिगरेट, ब्लैक होल, ज़ेहन का मंजरनामा, अलीम ताहिर के पाँच नोवेलैट, अलीम ताहिर के छह नोवेलैट, ख़्वाबों की गाड़ी, सुबह निकलता वह सूरज और ख़ामोश चीखें विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।