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पहचान: पत्रकार, उपन्यासकार, श्रमिक नेता और भारत-पाक दोस्ती के अग्रदूत
जमुना दास अख्तर का जन्म 2 नवंबर 1916 को रावलपिंडी में हुआ था। उनके पिता भगवान दास छब्बर, भाई मती दास के परिवार से ताल्लुक रखते थे और सरकारी कर्मचारी थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा सनातन धर्म हाई स्कूल और बाद में डी.ए.वी. कॉलेज, रावलपिंडी से प्राप्त की।
उनकी पत्रकारिता यात्रा 1931 में दैनिक "वंदे मातरम" (लाहौर) के रावलपिंडी प्रतिनिधि के रूप में शुरू हुई। बाद में वे "सनातन धर्म प्रचारक" (अमृतसर), "अर्जुन" (अमृतसर), "वीर भारत" (लाहौर), "मिलाप" (लाहौर), "देव भारत" और अन्य महत्वपूर्ण समाचार पत्रों से जुड़े रहे। 1946 से 1947 तक वे लाहौर से प्रकाशित होने वाले दैनिक "जय हिंद" के मुख्य संपादक (चीफ एडिटर) रहे। भारत के विभाजन के बाद वे दिल्ली स्थानांतरित हो गए और वहाँ भी "जय हिंद" का प्रकाशन जारी रखा। उन्होंने "सवेरा" और दैनिक "तेज" (दिल्ली) में भी सेवाएँ दीं और पंजाब विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में अंशकालिक (पार्ट-टाइम) व्याख्याता भी रहे। उनके लेख और कॉलम दैनिक नवा-ए-वक़्त, जंग, डेली न्यूज़ और मैग सहित पाकिस्तान के कई समाचार पत्रों में प्रकाशित होते रहे।
1947 के दंगों के दौरान उन्होंने मानवीय सहानुभूति और अद्वितीय साहस का प्रदर्शन किया। उन्होंने दिल्ली में हजारों अगवा की गई मुस्लिम लड़कियों को बरामद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जबकि पाकिस्तान के दौरे के दौरान लाहौर, शेखूपुरा, लायलपुर (फैसलाबाद), झंग और बंदर कोट से हिंदू और सिख लड़कियों को सुरक्षित बरामद कराया। भारत-पाक दोस्ती को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने "इंडो पाक प्रेम सभा" की स्थापना की और सामाजिक सेवाओं के तहत वेश्यावृत्ति के अड्डों से लगभग दो हजार लड़कियों को मुक्त कराने में भी सफल रहे।
पत्रकारिता के साथ-साथ वे श्रमिक (मजदूर) आंदोलन से भी जुड़े रहे। 1948 से 1968 तक वे 'ऑल इंडिया पोस्टमैन यूनियन' के महासचिव (जनरल सेक्रेटरी) रहे और विभिन्न राष्ट्रीय महासंघों (फेडरेशन्स) में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं। 1968 में पंजाब के राज्यपाल ने उन्हें 'सबॉर्डिनेट सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड' का अध्यक्ष नियुक्त किया, लेकिन उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई और बोर्ड को भंग करने की सिफारिश कर दी। बाद में वे पंजाब सरकार की विभिन्न सलाहकार समितियों से जुड़े रहे।
जमुना दास अख्तर उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी के उपन्यासकार भी थे। उनकी कृतियों में लगभग तीन दर्जन उपन्यास, राजनीतिक और ऐतिहासिक पुस्तकें शामिल हैं। उनके उपन्यास "आँसू" को चार भाषाओं में प्रकाशित होने का गौरव प्राप्त हुआ, जबकि "आग" भी उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में गिनी जाती है। पाकिस्तान की राजनीति पर अंग्रेजी में लिखी गई उनकी प्रमुख पुस्तकों में Political Conspiracies in Pakistan, Pak Espionage in India और The Saga of Bangladesh शामिल हैं।
प्राचीन इतिहास और पुरातत्व (आर्किओलॉजी) में उनकी गहरी रुचि थी। इसी शौक के तहत उन्होंने लंदन, बर्मिंघम, पेरिस, बर्लिन, वाशिंगटन और बगदाद के संग्रहालयों और पुस्तकालयों से चार हजार वर्ष पुरानी पांडुलिपियों (मैनुस्क्रिप्ट्स) और ऐतिहासिक दस्तावेजों की प्रतियां प्राप्त कीं। वे अंबेडकर रिसर्च इंस्टीट्यूट और आर्कियोलॉजिकल सोसाइटी के आजीवन सदस्य भी रहे।
उनकी साहित्यिक, पत्रकारिता और सामाजिक सेवाओं के सम्मान में दिल्ली उर्दू अकादमी, पंजाब के भाषा विभाग और मीर अकादमी लखनऊ सहित विभिन्न संस्थानों ने उन्हें पुरस्कारों से नवाज़ा।
निधन: जमुना दास अख्तर का निधन 2009 में दिल्ली में हुआ।