Font by Mehr Nastaliq Web

aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर
For any query/comment related to this ebook, please contact us at haidar.ali@rekhta.org

पुस्तक: परिचय

زیر نظر کتاب جو ابتدا سے عصر حاضر تک مبنی ہے اوراسے پانچ حصوں میں تقسیم کیا گیا ہے۔ در اصل اس موضوع پر چند گنی چنی کتابیں ہی موجود ہیں حالانکہ دونوں زبانیں ایک دوسرے سے بہت قریب ہیں۔ محمد حسن نےبہت ہی مدلل طریقہ سے اس موضوع کو واضح کرنے کی بھر پورکوشش کی ہے۔

.....और पढ़िए

लेखक: परिचय

पहचान: प्रगतिशील आलोचक, कवि, नाटककार, उपन्यासकार, संपादक और शिक्षक

प्रोफेसर मोहम्मद हसन का जन्म 1 जुलाई 1926 को मुरादाबाद के एक सम्मानित और धार्मिक परिवार में हुआ। प्रारम्भिक शिक्षा मदरसे में प्राप्त की और 1939 में ह्यूट मुस्लिम हाई स्कूल, मुरादाबाद से मैट्रिक किया। उच्च शिक्षा के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया जहाँ साहित्य के साथ राजनीति, संस्कृति और ललित कलाओं में गहरी रुचि पैदा हुई। 1946 में एम.ए. उर्दू और 1956 में पीएच.डी. की डिग्री हासिल की।

शुरुआत में उसी विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग में लेक्चरर रहे, फिर 1954 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से जुड़े, 1963 में दिल्ली विश्वविद्यालय में रीडर नियुक्त हुए, 1971 में कश्मीर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने और 1973 से 1991 तक जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। उन्होंने उर्दू पत्रकारिता, फ़िल्म, रेडियो और टेलीविज़न के लिए बाकायदा पोस्ट डिप्लोमा कोर्स शुरू किया। उनकी 78 से अधिक किताबें प्रकाशित हुईं और 1973 में उन्हें जवाहरलाल नेहरू फ़ेलोशिप जैसा बड़ा शोध सम्मान मिला।

उनकी बौद्धिक गठन प्रगतिशील आंदोलन के प्रभाव में हुई, जिस माहौल में सज्जाद ज़हीर, सरदार जाफ़री, एहतिशाम हुसैन और रशीद जहाँ जैसे लेखक सक्रिय थे। मगर उन्होंने प्रगतिशीलता को केवल नारा नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक और व्यापक जीवन-दृष्टि माना और हमेशा वस्तुनिष्ठ आलोचनात्मक रवैया अपनाया। आधुनिक प्रवृत्ति के कवि मीराजी के बारे में उनकी उदार दृष्टि प्रगतिशील आलोचना में विशिष्ट मानी जाती है।

प्रगतिशील विचारों के प्रसार के लिए उन्होंने 1976 में त्रैमासिक पत्रिका “अस्री अदब” जारी की जो बीस वर्षों से अधिक समय तक साहित्य और सामाजिक-राजनीतिक बहसों का महत्वपूर्ण मंच बनी रही। उनके अनुसार श्रेष्ठ साहित्य तत्काल समाधान देने के बजाय इंसान के सपनों और आकांक्षाओं को बदलता है और भविष्य के मनुष्य का निर्माण करता है।

फ़िक्शन में उनकी प्रमुख कृति उपन्यास “ग़म-ए-दिल वहशत-ए-दिल” है जो कवि मजाज़ लखनवी की जीवन-कथा पर आधारित एक जीवनीपरक उपन्यास है। कविता-संग्रह: “ज़ंजीर-ए-नग़्मा” और “ख़्वाब नगर”। उनकी नज़्मों, कहानियों और नाटकों में अत्याचार, तानाशाही और सामाजिक अन्याय के विरुद्ध तीखा प्रतिरोध मिलता है। आपातकाल के दौर में लिखा गया नाटक “ज़ह्हाक” इसी प्रतिरोधी चेतना की मिसाल है। मुस्लिम समाज की रूढ़िवादिता और स्त्री की दुर्दशा पर भी उन्होंने कठोर आलोचनात्मक रुख अपनाया।

वे जीवन भर प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े रहे और आधुनिकता तथा प्रगतिशीलता के बीच एक वैचारिक पुल का काम किया। उनके नज़दीक प्रगतिशीलता कोई फ़ॉर्मूला नहीं बल्कि एक बुनियादी रवैया है जो जीवन के हर छोटे-बड़े अनुभव को देखने का दृष्टिकोण देता है। वे लेखकों और बुद्धिजीवियों को समाज से जुड़े रहने, सच बोलने और निर्भीक रहने की प्रेरणा देते थे और मानते थे कि साहित्य नारों से अधिक स्थायी मानवीय मूल्यों की रचना करता है।

प्रोफेसर मोहम्मद हसन एक साथ आलोचक, इतिहासकार, कवि, उपन्यासकार, नाटककार और पत्रकार थे। प्रगतिशील आंदोलन के क्षीण पड़ जाने के बाद भी आख़िरी दम तक उसी विचारधारा के वफ़ादार और सक्रिय प्रतिनिधि रहे तथा अन्याय, शोषण और असमानता के विरुद्ध अपने विचार और लेखनी से संघर्ष करते रहे।

निधन: 25 अप्रैल 2010 को दिल्ली में हुआ।

.....और पढ़िए
For any query/comment related to this ebook, please contact us at haidar.ali@rekhta.org

लेखक की अन्य पुस्तकें

लेखक की अन्य पुस्तकें यहाँ पढ़ें।

पूरा देखिए

लोकप्रिय और ट्रेंडिंग

सबसे लोकप्रिय और ट्रेंडिंग उर्दू पुस्तकों का पता लगाएँ।

पूरा देखिए
बोलिए