aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
ग्यारहवीं सदी में सलीबी जंगों से लेकर उन्नीसवीं सदी में सल्तनत-ए-उस्मानिया के ज़वाल तक, यह किताब आलम-ए-इस्लाम के अहम ऐतिहासिक वाक़यात और सियासी कशमकश को बयान करती है। यह मुस्लिम दुनिया के मुख़्तलिफ़ अदवार के इन्क़लाबात और तहज़ीबी तसादुम का एक जामे' मंज़रनामा पेश करती है।