aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
तक़ी अस्करी की यह ऐतिहासिक तालीफ़ ग़दीर के वाक़्ये पर मबनी है। यह किताब फ़न का जाल और हक़ानियत का जमाल पेश करती है। इसमें तारीख़ की दबत में दफ़्न हक़ाइक़, मुह्कम आयात, मोतबर रिवायात और मुस्तनद तारीख़ी वाक़्यात को दिलनशीन अंदाज़ में पेश किया गया है। ख़ुतबा-ए-ग़दीर का तर्जुमा इसकी एक अहम खुसूसियत है। यह किताब ग़दीर के वाक़्यात और उनकी अहमियत से वाक़फ़ियत रखने वालों और न रखने वालों दोनों के लिए मुफ़ीद है।