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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

रद करें डाउनलोड शेर

लेखक : मोहम्मद ख़ाँ

प्रकाशक : दोस्त पब्लिकेशन्ज़, इस्लामाबाद

प्रकाशन वर्ष : 2011

भाषा : उर्दू

पृष्ठ : 212

ISBN संख्यांक / ISSN संख्यांक : 969-496-046-0

सहयोगी : इस्कुक लाइब्रेरी मालेगांव

बज़्म-ए-आराइयाँ
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पुस्तक: परिचय

इस किताब की बेश्तर तहरीरें तफ़रीही अंदाज़ में लिखी गई हैं। इन से न ही अफ़राद की आक़िबत संवरने का इम्कान है और न उम्मतों की तक़दीर में बदलने का। हाँ ये मुमकिन है कि इन तहरीरों से आप के चेहरे पर न सही, आप के ज़ेहन में एक रोशनी की किरन फूट पड़े। एक फ़रह़त की किरन! और ये हो जाए तो हमें अपनी पीठ थपकाने का हक़ होगा और अगर ये किरन न फूटे तो फिर आप अपनी पीठ थपका लें।

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