aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
इस किताब की बेश्तर तहरीरें तफ़रीही अंदाज़ में लिखी गई हैं। इन से न ही अफ़राद की आक़िबत संवरने का इम्कान है और न उम्मतों की तक़दीर में बदलने का। हाँ ये मुमकिन है कि इन तहरीरों से आप के चेहरे पर न सही, आप के ज़ेहन में एक रोशनी की किरन फूट पड़े। एक फ़रह़त की किरन! और ये हो जाए तो हमें अपनी पीठ थपकाने का हक़ होगा और अगर ये किरन न फूटे तो फिर आप अपनी पीठ थपका लें।