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पहचान: उर्दू के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य लेखक, विशिष्ट साहित्यकार
मुश्ताक अहमद यूसुफ़ी का जन्म 4 सितंबर 1923 को संयुक्त भारत के टोंक (राजस्थान) में एक शिक्षित और प्रतिष्ठित परिवार में हुआ। उनके पिता अब्दुल करीम ख़ान यूसुफ़ी जयपुर नगरपालिका के अध्यक्ष और बाद में जयपुर विधान सभा के स्पीकर रहे। यूसुफ़ी ने प्रारंभिक शिक्षा के बाद बी.ए. किया और फिर आगरा के प्रसिद्ध सेंट जॉन्स कॉलेज से दर्शनशास्त्र में एम.ए. किया। इसके बाद उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से एल.एल.बी. की डिग्री प्राप्त की।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा पास की और 1950 तक भारत में मुस्लिम कमर्शियल बैंक से जुड़े रहे, जहाँ वे डिप्टी जनरल मैनेजर के पद तक पहुँचे। विभाजन के बाद 1950 में वे पाकिस्तान चले गए और कराची में बस गए। वहाँ उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और अंततः मैनेजिंग डायरेक्टर बने। 1974 में वे यूनाइटेड बैंक के अध्यक्ष और 1977 में पाकिस्तान बैंकिंग काउंसिल के चेयरमैन बने। उन्होंने लगभग ग्यारह वर्षों तक लंदन में भी सेवाएँ दीं और 1990 में कराची लौट आए।
हालाँकि वे पेशे से एक सफल बैंकर थे, लेकिन उनकी वास्तविक पहचान उर्दू साहित्य के एक महान हास्य-व्यंग्य लेखक के रूप में है। उन्होंने अपने विशिष्ट शैली, सूक्ष्म दृष्टि और भाषा की मिठास के माध्यम से उर्दू हास्य को एक नई ऊँचाई दी।
उनकी प्रमुख कृतियों में "चिराग तले" (1941), "खाकम बदहन" (1949), "ज़रगुज़श्त" (1974), "आब-ए-गुम" (1990) और "शाम-ए-शेर-ए-याराँ" (2014) शामिल हैं, जो उर्दू साहित्य में क्लासिक का दर्जा रखती हैं।
उनकी साहित्यिक सेवाओं के सम्मान में पाकिस्तान सरकार ने उन्हें 1999 में "सितारा-ए-इम्तियाज़" और 2002 में "हिलाल-ए-इम्तियाज़" से सम्मानित किया।
निधन: 20 जून 2018 को कराची में उनका निधन हुआ।