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पहचान: लोकप्रिय उपन्यासकार, यथार्थवादी (हकीकत पसंद) और मनोविज्ञान के गहरे जानकार लेखक।
मोहिउद्दीन नवाब का जन्म 1930 में अविभाजित भारत के बंगाल प्रांत के खड़गपुर शहर में हुआ था। पाकिस्तान बनने के बाद उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) की ओर हिजरत की, और बांग्लादेश बनने के बाद वह दोबारा हिजरत करके पाकिस्तान आए और कराची को अपना स्थायी निवास बनाया। उनके जीवन की इन दो हिजरतों ने उनके मन, सोच और रचनात्मक समझ पर गहरे प्रभाव छोड़े, जिनकी झलक उनके उपन्यासों में बार-बार दिखाई देती है।
हालाँकि उनका जन्म बंगाल में हुआ था, लेकिन उनके घर का माहौल उर्दू भाषा से जुड़ा हुआ था, जिसके कारण उर्दू उनकी वैचारिक और रचनात्मक भाषा बनी। वह निबंधकार, कहानीकार और कवि भी थे, लेकिन उनकी असली पहचान एक उपन्यासकार के रूप में है। उनकी कलम मानवीय मनोविज्ञान, सामाजिक असमानताओं, राजनीतिक समझ, प्रेम और जीवन की कड़वी और मीठी सच्चाइयों का आईना है।
मोहिउद्दीन नवाब के उपन्यास आकार में संक्षिप्त भी हैं और हज़ारों पन्नों के लंबे भी, लेकिन उनकी कहानियों में दिलचस्पी, तालमेल और वैचारिक गहराई हर जगह बनी रहती है। उनका विश्व प्रसिद्ध उपन्यास "देवता" उर्दू साहित्य के इतिहास का एक अनोखा अध्याय है, जिसके बारे में नवाब साहब का यह दावा मशहूर है कि जो व्यक्ति इसके सौ पन्ने पढ़ ले, वह इसे पूरा किए बिना नहीं रह सकता।
मोहिउद्दीन नवाब ने राजनीतिक, सामाजिक, ऐतिहासिक और सांसारिक सभी विषयों पर अपनी कलम चलाई। सामाजिक समस्याओं पर उनका लेखन इतना गहरा और विश्लेषणात्मक है कि उन्हें "समाज का सर्जन" (जराह-ए-मुआशरा) भी कहा गया। कमज़ोर वर्गों पर होने वाला अन्याय, सामाजिक असमानता, वर्ग संघर्ष और मानवीय शोषण उनके उपन्यासों के मुख्य विषय रहे हैं।
निधन: मोहिउद्दीन नवाब का निधन शनिवार, 6 फरवरी 2016 को कराची में हुआ।