aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
यह किताब बिहार में उर्दू तहरीक की एक अहम शख़्सियत ग़ुलाम सरवर पर एक फ़र्द नामा है। प्रोफ़ेसर एहसान अशरफ़ ने इसे तस्नीफ़ किया है और इसमें सरवर की ज़िंदगी, सहाफ़ी, अदीब, सियासी कारकुन और बिहार में उर्दू को दूसरी सरकारी ज़बान का दर्जा दिलाने में उनकी अहम खि़दमात का एक जामे' जायज़ा पेश किया गया है। यह किताब उर्दू ज़बान-ओ-अदब, ख़ास तौर पर बिहार की अदबी रिवायत के तनाज़ुर में उनकी पाइदार मीरास और असरात को उजागर करती है।