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लेखक: परिचय

पहचान: प्रख्यात इस्लामी विद्वान, मुफस्सिर, लेखक, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद की केंद्रीय शूरा के सदस्य तथा जामिया अस्सालिहात रामपुर के संस्थापक व संरक्षक

मौलाना मुहम्मद यूसुफ इस्लाही का जन्म 9 जुलाई 1932 को ज़िला अटक (पंजाब, पाकिस्तान) के कस्बा परमली में हुआ। 1936 में वे अपने पिता शेखुल हदीस मौलाना अब्दुल कदीम के साथ बरेली (उत्तर प्रदेश, भारत) आ गए।

उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा बरेली में प्राप्त की और इस्लामिया इंटर कॉलेज से हाई स्कूल पास किया। इसके बाद मज़ाहिरुल उलूम सहारनपुर में अध्ययन किया, फिर मदरसा अल-इस्लाह सराय मीर में चार वर्षों तक शिक्षा प्राप्त की, जहाँ उन्हें मौलाना अख्तर अहसन इस्लाही जैसे महान शिक्षक की शिष्यता मिली।

1951 में उन्होंने सैयद अबुल आला मौदूदी की पुस्तक तनक़ीहात पढ़ी, जिससे वे गहराई से प्रभावित हुए। 1954 में वे जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के सदस्य बने और जीवन भर इस आंदोलन के सक्रिय नेता तथा केंद्रीय शूरा के सदस्य रहे।

उन्होंने रामपुर (उत्तर प्रदेश) को अपना स्थायी केंद्र बनाया। मौलाना अबू सलीम अब्दुल हई के बाद उन्होंने जामिया अस्सालिहात रामपुर की देखरेख संभाली और इसे पूरे भारत में एक आदर्श संस्थान के रूप में स्थापित किया। 1972 में उन्होंने मासिक पत्रिका ज़िक्ऱा शुरू की, जो बाद में ज़िक्ऱा नई के नाम से प्रकाशित होती रही।

उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं: आदाब-ए-ज़िंदगी, कुरआनी तालीमात, तफ़हीमुल हदीस, दाई-ए-आज़म, आसान फ़िक़्ह, हुस्न-ए-मुआशरत इस्लामी तौहीद, शऊर-ए-हयात आदि.

उनकी पुस्तक आदाब-ए-ज़िंदगी आधी सदी से अधिक समय से मुस्लिम घरों में एक मार्गदर्शक पुस्तक के रूप में प्रचलित है।

उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली और दिल को छू लेने वाली थी।

निधन: 21 दिसंबर 2021 को उनका निधन हुआ।

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