aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
यह उर्दू में जंग-ए जमाल पर एक ऐतिहासिक रिसाला है, जिसमें इसकी वजुहात, अहम शख्सियात और हज़रत उस्मान की शहादत के बाद के वाक़यात पर बहस की गई है। मुसन्निफ़ तारीख़ी तहक़ीक़ को अदबी अंदाज़ में पेश करता है।