aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
राही मासूम रज़ा का जन्म 1 सितंबर 1927 को उत्तर प्रदेश के गाज़ीपुर ज़िले के गंगौली गाँव में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गाज़ीपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में प्राप्त की तथा उच्च शिक्षा के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया। उन्होंने हिंदुस्तानी साहित्य में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और साहित्य को अपना कार्यक्षेत्र बनाया।
बाद में वो बंबई (वर्तमान मुंबई) चले गए और एक सफल पटकथा लेखक के रूप में प्रसिद्ध हुए। उन्होंने 300 से अधिक फ़िल्मों के लिए पटकथाएँ और संवाद लिखे, जिनमें प्रसिद्ध टेलीविज़न धारावाहिक “महाभारत” भी शामिल है।
राही मासूम रज़ा की अनेक रचनाएँ भारत-विभाजन के परिणामस्वरूप उत्पन्न पीड़ा, उथल-पुथल और मानवीय त्रासदी का सजीव चित्रण करती हैं। उनके साहित्य में सामंती भारत के जीवन के साथ-साथ आम लोगों की ख़ुशियाँ, प्रेम, दुख और संवेदनाएँ भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत हुई हैं।
उनकी प्रमुख कृतियों में 'आधा गाँव' (उपन्यास), 'टोपी शुक्ला' (उपन्यास), 'ओस की बूँद' (उपन्यास), 'नीम का पेड़' (उपन्यास एवं टीवी धारावाहिक), 'मैं तुलसी तेरे आँगन की' (पटकथा लेखन) और 'महाभारत' (टीवी धारावाहिक) शामिल हैं।
उन्हें वर्ष 1979 में फ़िल्म 'मैं तुलसी तेरे आँगन की' के लिए फ़िल्मफ़ेयर का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार भी प्राप्त हुआ। 15 मार्च 1992 को मुंबई में उनका निधन हो गया।