लेखक : गोपी चंद नारंग

प्रकाशक : डायरेक्टर क़ौमी कौंसिल बरा-ए-फ़रोग़-ए-उर्दू ज़बान, नई दिल्ली

प्रकाशन वर्ष : 2002

भाषा : Urdu

श्रेणियाँ : शोध एवं समीक्षा

उप श्रेणियां : ग़ज़ल

पृष्ठ : 455

सहयोगी : गोपी चंद नारंग

urdu ghazal aur hindustani zahen-o-tahzeeb

पुस्तक: परिचय

گوپی چند نارنگ کی اہم کتاب"اردو غزل اور ہندوستانی ذہن و تہذیب" کا دائرۂ فکر بے حد وسیع ہے۔ اس میں قدیم ہندوستانی تہذیب اور اسلامی تہذیب کے علاوہ مشترک ہندوستانی تہذیب میں کارفرما اور عمل آور کئی صیغہ ہائے فکر اور مختلفُ المآخذ عناصر ترکیبی پر بڑی دقّتِ نظر کے ساتھ توجہ کی گئی ہے۔ بعد ازاں اردو غزل کے جمالیاتی، نظریاتی اور فنی پہلوؤں پر بعض توجیہات کا بھی بڑی کاوش سے اطلاق کیا گیا ہے۔ گویا غزل کی صنف کا بظاہر راسخ مگر بباطن لچیلا کردار کثرت ہی کو وحدت میں نہیں ضم کرتا بلکہ تجزیے کے منتشر اجزا کی شیرازہ بندی بھی کر دیتا ہے اور یہ وہ خوبی ہے جس سے غزل کا ہر شعر متصف ہوتا ہے۔اس کتاب میں انھوں نے اس بات کو مدلل انداز میں ثابت کیا ہے کہ اردو غزل کی جڑیں کس طرح دور دور تک ہندوستانی تہذیب میں پیوست ہیں ، اردو غزل کس طرح مشترکہ ہندوستانی تہذٰب کی علبردار ہے۔ کس طرح ہندوستانی تہذیب کی نمائندہ ہے، کس طرح وہ ان دنوں تہذیبوں کے ملن سے وجود میں ، اس کتاب میں ہندوستانی غزل کی روح کو انھوں نے مکمل طور پر اس طرح سمو دیا ہے جس سے ہندوستانی غزل پوری آب وتاب کے ساتھ اردو شعرو ادب کی مرکزی صنف کے طور پر سامنے آئی ہے ۔

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लेखक: परिचय

गोपी चंद नारंग उर्दू के एक बड़े आलोचक,विचारक और भाषाविद हैं। एक अदीब, नक़्क़ाद, स्कालर और प्रोफ़ेसर के रूप में वो हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों मुल्कों में समान रूप से लोकप्रिय हैं। गोपी चंद नारंग के नाम यह अनोखा रिकॉर्ड है कि उन्हें पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से प्रसिद्ध नागरिक सम्मान सितारा ए इम्तियाज़ और भारत सरकार की ओर से पद्मभूषण और पद्मश्री जैसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों से नवाज़ा गया है। उनकी साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें और भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया है। जिनमें इटली का मिज़ीनी गोल्ड मेडल, शिकागो का अमीर खुसरो अवार्ड, ग़ालिब अवार्ड, कैनेडियन एकेडमी ऑफ उर्दू लैंग्वेज एंड लिटरेचर अवार्ड और यूरोपीय उर्दू राइटर्स अवार्ड शामिल हैं। वह साहित्य अकादेमी के प्रतिष्ठित पुरस्कार से भी सम्मानित थे तथा साहित्य अकादेमी के फ़ेलो थे।
नारंग ने उर्दू के अलावा हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में भी किताबें लिखी हैं। उनकी गिनती उर्दू के प्रबल समर्थकों में की जाती है। वो इस हक़ीक़त पर अफ़सोस करते हैं कि उर्दू ज़बान सियासत का शिकार रही है। उनका मानना है कि उर्दू की जड़ें हिंदुस्तान में हैं और हिंदी दर असल उर्दू ज़बान की बहन है।

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