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Ai dil mujhe aisi jagah le chal
Ai dil mujhe aisi jagah le chal
Dil chiz kya hai aap meri jaan lijiye
ek shahenshah ne banwa ke hasi.n taj mahal
Ganga Jamuna Eid Milan Mushaira
Ganga Jamuna Eid Milan Mushaira
Hoshwalon ko khabar kya bekhudi kya cheez hai
In aankhon ki masti ke
ishq ki garmi-e-jazbaat kise pesh karoon
Jurm-E-Ulfat Pe Hamen Log Saza Dete Hain
Kabhi khud pe kabhi haalaat pe rona aaya
Karoge yaad to har baat yaad aayegi
khaali haath shaam aayi hai
Khuda ka shukr sahare baghair beet gai
Khuda ka shukr sahare baghair beet gai
Khudi Ka Sirr-E-Niha by Shafqat Amanat Ali & Sanam Marvi
Koi saaghar dil ko behlaata nahin
Koi ye kaise bataye (Movie- Arth) written by Kaifi Azmi
Phir chhidi raat baat phulon ki
Rang aur noor ki baaraat kise pesh karun
ruke ruke se qadam
Shaam-e-gham ki qasam
tamaam umr tiraa intizaar ham ne kiyaa
Tumko dekhta to ye khayal aaya
Uthaye ja unke sitam aur jiye ja
Wo kaghaz ki kashti wo barish ka pani
Zinda hoon is tarah ki gham-e-zindagi nahin
अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
आज जाने की ज़िद न करो
आदमी-नामा
आप की याद आती रही रात भर
आप की याद आती रही रात भर
आवारा
आह को चाहिए इक उम्र असर होते तक
इश्क़ मुझ को नहीं वहशत ही सही
इस भरी दुनिया में कोई भी हमारा न हुआ
उन को ये शिकायत है कि हम कुछ नहीं कहते
ऐ इश्क़ ये सब दुनिया वाले बे-कार की बातें करते हैं
ऐ मोहब्बत तिरे अंजाम पे रोना आया
कभी ऐ हक़ीक़त-ए-मुंतज़र नज़र आ लिबास-ए-मजाज़ में
कभी कभी
कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कभी नेकी भी उस के जी में गर आ जाए है मुझ से
कहीं से मौत को लाओ कि ग़म की रात कटे
किस तरह जीते हैं ये लोग बता दो यारो
किसी की याद में दुनिया को हैं भुलाए हुए
किसे मालूम था इक दिन मोहब्बत बे-ज़बाँ होगी
ख़ूबसूरत मोड़
चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
चेहरे पे ख़ुशी छा जाती है आँखों में सुरूर आ जाता है
जब जब तुम्हें भुलाया तुम और याद आए
ज़िंदगी जब भी तिरी बज़्म में लाती है हमें
जुस्तुजू जिस की थी उस को तो न पाया हम ने
झुकी झुकी सी नज़र बे-क़रार है कि नहीं
तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम
ताज-महल
तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
दीवारों से मिल कर रोना अच्छा लगता है
न किसी की आँख का नूर हूँ न किसी के दिल का क़रार हूँ
न झटको ज़ुल्फ़ से पानी ये मोती टूट जाएँगे
नुक्ता-चीं है ग़म-ए-दिल उस को सुनाए न बने
पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है
फ़क़ीराना आए सदा कर चले
फिर मुझे दीदा-ए-तर याद आया
बंजारा-नामा
मकान
मिरी दास्ताँ मुझे ही मिरा दिल सुना के रोए
मुझ से पहली सी मोहब्बत मिरी महबूब न माँग
मोहब्बत तर्क की मैं ने गरेबाँ सी लिया मैं ने
यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ
यूँ हसरतों के दाग़ मोहब्बत में धो लिए
ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है
ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा
ये दिल ये पागल दिल मिरा क्यूँ बुझ गया आवारगी
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो
लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में
लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में
शमशीर-ए-बरहना माँग ग़ज़ब बालों की महक फिर वैसी ही
सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता
सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है
सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
हम हैं मता-ए-कूचा-ओ-बाज़ार की तरह
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते
seek-warrow-w
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