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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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आ रही है शब-ए-ग़म मेरी तरफ़ मेरे लिए

शमीम करहानी

आ रही है शब-ए-ग़म मेरी तरफ़ मेरे लिए

शमीम करहानी

MORE BYशमीम करहानी

    रही है शब-ए-ग़म मेरी तरफ़ मेरे लिए

    साक़िया चश्म-ए-करम मेरी तरफ़ मेरे लिए

    थकने लगता हूँ तो आवाज़ सी आती है कोई

    और दो-चार क़दम मेरी तरफ़ मेरे लिए

    लोग कहते हैं कि हो जाती है दुनिया रंगीं

    इक नज़र मेरी क़सम मेरी तरफ़ मेरे लिए

    पाएलें कू-ए-निगाराँ में खनक उठती हैं

    जब वो रखते हैं क़दम मेरी तरफ़ मेरे लिए

    झिलमिलाते हुए तारे ही सही सुब्ह-ए-फ़िराक़

    हैं तो कुछ दीदा-ए-नम मेरी तरफ़ मेरे लिए

    हाए वो बेकसी-ए-इश्क़ कि दुनिया थी ख़िलाफ़

    दैर ही था हरम मेरी तरफ़ मेरे लिए

    होगी कुछ ऐसी ही मजबूरी-ए-हालात 'शमीम'

    इल्तिफ़ात अब जो है कम मेरी तरफ़ मेरे लिए

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