आँख बरसी है तिरे नाम पे सावन की तरह

मुर्तज़ा बरलास

आँख बरसी है तिरे नाम पे सावन की तरह

मुर्तज़ा बरलास

MORE BYमुर्तज़ा बरलास

    आँख बरसी है तिरे नाम पे सावन की तरह

    जिस्म सुलगा है तिरी याद में ईंधन की तरह

    लोरियाँ दी हैं किसी क़ुर्ब की ख़्वाहिश ने मुझे

    कुछ जवानी के भी दिन गुज़रे हैं बचपन की तरह

    इस बुलंदी से मुझे तू ने नवाज़ा क्यूँ था

    गिर के मैं टूट गया काँच के बर्तन की तरह

    मुझ से मिलते हुए ये बात तो सोची होती

    मैं तिरे दिल में समा जाऊँगा धड़कन की तरह

    अब ज़ुलेख़ा को बद-नाम करेगा कोई

    उस का दामन भी दरीदा मिरे दामन की तरह

    मुंतज़िर है किसी मख़्सूस सी आहट के लिए

    ज़िंदगी बैठी है दहलीज़ पे ब्रिहन की तरह

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    एजाज़ क़ासिर

    एजाज़ क़ासिर

    स्रोत :
    • पुस्तक : kulliyat -e-Murtaza Barlas (पृष्ठ 119)
    • रचनाकार : Murtaza Barlas
    • प्रकाशन : Alhamd Publication Lahore (2011)
    • संस्करण : 2011

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