बहर-सूरत हैं हम शीरीनि-ए-गुफ़्तार के सदक़े

ख़ार देहलवी

बहर-सूरत हैं हम शीरीनि-ए-गुफ़्तार के सदक़े

ख़ार देहलवी

MORE BYख़ार देहलवी

    बहर-सूरत हैं हम शीरीनि-ए-गुफ़्तार के सदक़े

    तिरे इक़रार के सदक़े तिरे इंकार के सदक़े

    ख़ुशा ज़ौक़-ए-तलब इस हसरत-ए-दीदार के सदक़े

    हुए हैं बाम-ओ-दर के रौज़न दीवार के सदक़े

    नवाज़िश हो नवाज़े गर निगाह-ए-लुत्फ़ से उस को

    तिरा बीमार तेरी नर्गिस-ए-बीमार के सदक़े

    क़दम ले कर कलेजे से लगाते हैं कभी उस को

    कभी होते हैं हम चश्म लब रुख़्सार के सदक़े

    जहान-ए-आरज़ू में हुस्न का भी नाम हो जाए

    मज़ा जाए वो गुल भी अगर हो 'ख़ार' के सदक़े

    स्रोत:

    • पुस्तक : Aazadi ke baad dehli men urdu gazal (पृष्ठ 130)

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