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दास्ताँ इश्क़ की अंजाम तक आ पहुँची है

उमर क़ुरैशी

दास्ताँ इश्क़ की अंजाम तक आ पहुँची है

उमर क़ुरैशी

MORE BYउमर क़ुरैशी

    दास्ताँ इश्क़ की अंजाम तक पहुँची है

    बात अब हसरत-ए-नाकाम तक पहुँची है

    जाने क्या हाल हो रिंदान-ए-बला-नोश का अब

    मय-कशी दुर्द-ए-तह-ए-जाम तक पहुँची है

    बात फैली है तिरे ज़ुल्म की शहरों शहरों

    दास्ताँ तेरी मिरे नाम तक पहुँची है

    जाने किस राह से लाया है मुझे ज़ौक़-ए-तलब

    जुस्तुजू गर्दिश-ए-अय्याम तक पहुँची

    इक नई सुब्ह का भी ज़िक्र है आने वाला

    गुफ़्तुगू वक़्त की अब शाम तक पहुँची है

    शिकवा-ए-तिश्ना-लबी ख़ैर हो मयख़ाने की

    भीड़ अब साक़ी-ए-गुलफ़ाम तक पहुँची है

    सोचते क्या हो उमर के क़रीब-ए-मंज़िल

    बात अब जुरअत-ए-दो-गाम तक पहुँची हे

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