दयार-ए-नूर में तीरा-शबों का साथी हो

इफ़्तिख़ार आरिफ़

दयार-ए-नूर में तीरा-शबों का साथी हो

इफ़्तिख़ार आरिफ़

MORE BYइफ़्तिख़ार आरिफ़

    दयार-ए-नूर में तीरा-शबों का साथी हो

    कोई तो हो जो मिरी वहशतों का साथी हो

    In realms of light, in my dark nights, be with me

    I wander in strange ways? You must be with me

    मैं उस से झूट भी बोलूँ तो मुझ से सच बोले

    मिरे मिज़ाज के सब मौसमों का साथी हो

    I tell you lies? You must speak truly to me

    In all the seasons of my heart, be with me

    मैं उस के हाथ आऊँ वो मेरा हो के रहे

    मैं गिर पड़ूँ तो मिरी पस्तियों का साथी हो

    I am not yours? You must be mine for ever

    If I should fall, there where I lie be with me

    वो मेरे नाम की निस्बत से मो'तबर ठहरे

    गली गली मिरी रुस्वाइयों का साथी हो

    My name is linked with yours: you are respected

    When I am shamed in every lane, be with me.

    करे कलाम जो मुझ से तो मेरे लहजे में

    मैं चुप रहूँ तो मेरे तेवरों का साथी हो

    You speak to me? Then speak to me with my voice

    I speak with silent look? Then too be with me

    मैं अपने आप को देखूँ वो मुझ को देखे जाए

    वो मेरे नफ़्स की गुमराहियों का साथी हो

    My eyes are for myself? So too must yours be

    Desires lead me astray? You must be with me

    वो ख़्वाब देखे तो देखे मिरे हवाले से

    मिरे ख़याल के सब मंज़रों का साथी हो

    If you should dream, your dreams must be about me

    In every scene my fancy paints, be with me.


    नोमान शौक़

    नोमान शौक़

    इफ़्तिख़ार आरिफ़

    इफ़्तिख़ार आरिफ़

    नोमान शौक़

    दयार-ए-नूर में तीरा-शबों का साथी हो नोमान शौक़

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.


    About this sher

    Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Morbi volutpat porttitor tortor, varius dignissim.


    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.