दिल अजब जल्वा-ए-उम्मीद दिखाता है मुझे

यगाना चंगेज़ी

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यगाना चंगेज़ी

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    रोचक तथ्य

    1922

    दिल अजब जल्वा-ए-उम्मीद दिखाता है मुझे

    शाम से 'यास' सवेरा नज़र आता है मुझे

    जल्वा-ए-दार-ओ-रसन अपने नसीबों में कहाँ

    कौन दुनिया की निगाहों पे चढ़ाता है मुझे

    दिल को लहराता है हंगामा-ए-ज़िंदान-ए-बला

    शोर-ए-ईज़ा-तलबी वज्द में लाता है मुझे

    पा-ए-आज़ाद है ज़िंदाँ के चलन से बाहर

    बेड़ियाँ क्यूँ कोई दीवाना पहनाता है मुझे

    हँस के कहता है कि घर अपना क़फ़स को समझो

    सबक़ उल्टा मिरा सय्याद पढ़ाता है मुझे

    जैसे दोज़ख़ की हवा खा के अभी आया है

    किस क़दर वाइज़-ए-मक्कार डराता है मुझे

    फट पड़ें अब ही दर-ओ-बाम तो पर्दा रह जाए

    फ़लक-ए-ख़ाना-ख़राब आँख दिखाता है मुझे

    दीदनी है चमन-आराई-ए-चश्म-ए-इबरत

    सैर-ए-ताज़ा गुल-ए-पज़मुर्दा दिखाता है मुझे

    तर्क-ए-मतलब से है मतलब तो दुआएँ कैसी

    सुब्ह तक क्यूँ दिल-ए-बीमार जगाता है मुझे

    नंग-ए-महफ़िल मिरा ज़िंदा मिरा मुर्दा भारी

    कौन उठाता है मुझे कौन बिठाता है मुझे

    लब-ए-दरिया का हुआ मैं तह-ए-दरिया का

    कौन से घाट ये धारा लिए जाता है मुझे

    पाँव सोए हैं मगर जागते हैं अपने नसीब

    क्या समझ कर जरस-ए-गुंग जगाता है मुझे

    'यास' मंज़िल है मिरी मंज़िल-ए-अनक़ा-ए-कमाल

    लखनऊ में कोई क्यूँ ढूँडने आता है मुझे

    स्रोत :
    • पुस्तक : Kulliyat-e-Yagana (पृष्ठ 313)
    • रचनाकार : Meerza Yagana Changezi Lukhnawi
    • प्रकाशन : Farib Book Depot (P) Ltd. (2005)
    • संस्करण : 2005

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