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इस तरह आँखों को नम दिल पर असर करते हुए

रज़ा मौरान्वी

इस तरह आँखों को नम दिल पर असर करते हुए

रज़ा मौरान्वी

MORE BYरज़ा मौरान्वी

    इस तरह आँखों को नम दिल पर असर करते हुए

    जा रहा है कौन नेज़ों पर सफ़र करते हुए

    ज़िंदगी फ़ाक़ों के साए में बसर करते हुए

    जी रहा हूँ ख़ून-ए-दिल ख़ून-ए-जिगर करते हुए

    लिख रहा हूँ नाम बच्चों के ग़मों की जाइदाद

    उन की सुब्ह-ए-ज़िंदगी को दोपहर करते हुए

    इतने वहशत-नाक मंज़र पुतलियों में बस गए

    ख़्वाब भी डरने लगे आँखों में घर करते हुए

    सीना-ए-मौज-ए-रवाँ को आबलों से भर दिया

    प्यास की शिद्दत ने पानी पर असर करते हुए

    वक़्त की रफ़्तार से भी तेज़ चलना है मुझे

    जा रहा हूँ अब हवा को हम-सफ़र करते हुए

    जाने कितनी ठोकरें खाईं हैं मैं ने 'रज़ा'

    ए'तिदाल-ए-ज़िंदगी को तेज़-तर करते हुए

    ગુજરાતી ભાષા-સાહિત્યનો મંચ : રેખ્તા ગુજરાતી

    ગુજરાતી ભાષા-સાહિત્યનો મંચ : રેખ્તા ગુજરાતી

    મધ્યકાલથી લઈ સાંપ્રત સમય સુધીની ચૂંટેલી કવિતાનો ખજાનો હવે છે માત્ર એક ક્લિક પર. સાથે સાથે સાહિત્યિક વીડિયો અને શબ્દકોશની સગવડ પણ છે. સંતસાહિત્ય, ડાયસ્પોરા સાહિત્ય, પ્રતિબદ્ધ સાહિત્ય અને ગુજરાતના અનેક ઐતિહાસિક પુસ્તકાલયોના દુર્લભ પુસ્તકો પણ તમે રેખ્તા ગુજરાતી પર વાંચી શકશો

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