न लतीफ़ शाम की जुस्तुजू न हसीं सहर की तलाश है

अज़ीज़ वारसी

न लतीफ़ शाम की जुस्तुजू न हसीं सहर की तलाश है

अज़ीज़ वारसी

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    लतीफ़ शाम की जुस्तुजू हसीं सहर की तलाश है

    जो नज़र नज़र को नवाज़ दे मुझे उस नज़र की तलाश है

    मिरे हम-सफ़र तुझे क्या ख़बर ये नज़र नज़र की तलाश है

    मिरी राहबर को है जुस्तुजू तुझे राहबर की तलाश है

    जो अजल को जाने हयात-ए-नौ जो हयात-ए-नौ को अजल कहे

    मुझे रह-गुज़ार-ए-हयात में उसी हम-सफ़र की तलाश है

    हो फ़र्क़ दैर-ओ-हरम जहाँ हो अपना अपना सनम जहाँ

    उसी रहगुज़र की तलाश थी उसी रहगुज़र की तलाश है

    जो बस एक पहली निगाह में मिरे दिल का राज़ समझ सके

    मुझे इब्तदा-ए-हयात से इसी दीदा-वर की तलाश है

    मिरे ज़ौक़-ए-दर्द का हौसला सर-ए-बज़्म कहता है बरमला

    वो 'अज़ीज़' कैफ़ से दूर है जिसे चारागर की तलाश है

    स्रोत:

    • पुस्तक : Mehraab (पृष्ठ 119)
    • रचनाकार : Aziiz vaarsii
    • प्रकाशन : Maktaba Nida-e-ittiihaad (1976)
    • संस्करण : 1976

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