सुलगती रेत पे चलना पड़े ख़ुदा न करे

रम्ज़ अज़ीमाबादी

सुलगती रेत पे चलना पड़े ख़ुदा न करे

रम्ज़ अज़ीमाबादी

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    सुलगती रेत पे चलना पड़े ख़ुदा करे

    मिरी तरह तुझे क़िस्मत बरहना-पा करे

    फिर इस के बाद मिरी ज़िंदगी वफ़ा करे

    मैं तुझ को भूल के ज़िंदा रहूँ ख़ुदा करे

    इक एक पल है अज़िय्यत नफ़स नफ़स है अज़ाब

    जो मुझ को देख ले जीने का हौसला करे

    जिसे मजाल-ए-तकल्लुम हो वो चुप बैठे

    बड़ों की बात सुने कोई तब्सिरा करे

    छुए बग़ैर चराग़ों को वो गुज़र जाए

    हवा से कोई भी ऐसा मुतालबा करे

    ये नस्ल लफ़्ज़-ए-मोहब्बत से आश्ना ही नहीं

    कोई किसी से भी तहज़ीब का गिला करे

    ख़बर ये है कि उधर चल रही है गर्म हवा

    कोई परिंदा भी हिजरत का फ़ैसला करे

    सुलूक जिस का हो सब के लिए शजर जैसा

    किसी भी उम्र में बच्चों का आसरा करे

    ये मशवरा है मिरा 'रम्ज़' ए'तिराज़ नहीं

    पराई आग बुझाने में ख़ुद जला करे

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