तौर अपना है अलग ईं से अलग आँ से अलग

सय्यद जमील मदनी

तौर अपना है अलग ईं से अलग आँ से अलग

सय्यद जमील मदनी

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    तौर अपना है अलग ईं से अलग आँ से अलग

    गो किसी तौर नहीं हिकमत-ए-यज़्दाँ से अलग

    ज़ीस्त इक और भी है क़ैद-ए-रग-ए-जाँ से अलग

    सुब्ह-ए-ताबाँ से जुदा शाम-ए-ग़रीबाँ से अलग

    ज़ुल्मत-ए-शब की तरह नूर-ए-शबिस्ताँ से अलग

    ग़म-ए-दौराँ से अलग इश्क़-ए-निगाराँ से अलग

    गर तिरे वास्ते दिल धड़के तो ज़िंदा तू है

    दिल की आवाज़ है आवाज़-परेशाँ से अलग

    जब कभी फ़िक्र मिरा रम्ज़-ए-अना से उलझा

    आलम इक और बना आलम-ए-इम्काँ से अलग

    उम्र यूँ हम ने गुज़ारी है ज़माने में 'जमील'

    रम-ए-ज़ीस्त में शामिल ग़म-ए-जाँ से अलग

    स्रोत:

    • पुस्तक : Shora-e-London (पृष्ठ 63)
    • रचनाकार : Jauhar Zahiri
    • प्रकाशन : Books From India (U.K) Ltd. 45, Museum Street, Londan W.C-1 (1985)
    • संस्करण : 1985

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