तिरा आँचल इशारे दे रहा है

अकबर हमीदी

तिरा आँचल इशारे दे रहा है

अकबर हमीदी

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    तिरा आँचल इशारे दे रहा है

    फ़लक रौशन सितारे दे रहा है

    हवा सहला रही है उस के तन को

    वो शोला अब शरारे दे रहा है

    खुले हैं फूल हर-सू जैसे कोई

    तिरा सदक़ा उतारे दे रहा है

    गुज़रने वाले कब थे हिज्र के दिन

    मगर आशिक़ गुज़ारे दे रहा है

    जुनूबी एशिया को जैसे 'अकबर'

    ये दिन कोई उधारे दे रहा है

    स्रोत :
    • पुस्तक : Quarterly TASTEER Lahore (पृष्ठ 163)
    • रचनाकार : Naseer Ahmed Nasir
    • प्रकाशन : Room No.-1,1st Floor, Awan Plaza, Shadman Market, Lahore (Issue No. 5,6 April To Sep. 1998)
    • संस्करण : Issue No. 5,6 April To Sep. 1998

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