उस बात का कोई रंज नहीं हम उस की तवज्जोह पा न सके

फ़रहत शहज़ाद

उस बात का कोई रंज नहीं हम उस की तवज्जोह पा न सके

फ़रहत शहज़ाद

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    उस बात का कोई रंज नहीं हम उस की तवज्जोह पा सके

    अफ़्सोस हमें बस इतना है हम दिल का हाल छुपा सके

    वो इतना अच्छा है उस को हर कोई अपना कहता है

    पर हम क्यूँ अपना समझे थे ये बात उसे समझा सके

    हम आज से पहले ज़ख़्मों पर हँसती आँखों से रोते थे

    इस बार मगर दुख ऐसा है हँसना तो जुदा मुस्का सके

    दो लफ़्ज़ बयाँ कर देते हैं इक उम्र का अपनी अफ़्साना

    वो छोड़ के गुलशन सका हम छोड़ के सहरा जा सके

    दिल इक ज़िद्दी बच्चे की तरह 'शहज़ाद' से बिगड़ा बैठा है

    जुज़ इक नाराज़ से पत्थर के कोई और उसे बहला सके

    स्रोत :
    • पुस्तक : aa.iinaa jhuuTaa Hai (पृष्ठ 151)
    • रचनाकार : FARHAT SHAHZAD
    • प्रकाशन : Al-Hamd Publications (2001)
    • संस्करण : 2001

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