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मीर तक़ी मीर

1722-23 - 1810 | दिल्ली, भारत

उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ' ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है.

उर्दू के पहले सबसे बड़े शायर जिन्हें ' ख़ुदा-ए-सुख़न, (शायरी का ख़ुदा) कहा जाता है.

ग़ज़ल 345

शेर 183

गर ठहरे मलक आगे उन्हों के तो अजब है

फिरते हैं पड़े दिल्ली के लौंडे जो परी से

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बाहम हुआ करें हैं दिन रात नीचे ऊपर

ये नर्म-शाने लौंडे हैं मख़मल-ए-दो-ख़्वाबा

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मुँह खोले तो रोज़ है रौशन ज़ुल्फ़ बिखेरे रात है फिर

इन तौरों से आशिक़ क्यूँ-कर सुब्ह को अपनी शाम करें

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रुबाई 106

मर्सिया 34

मीरियात 1671

क़सीदा 8

क़ितआ 26

ई-पुस्तक 112

अफ़्कार-ए-मीर

 

1996

अहसन-उल-इंतिख़ाब

 

1936

Asaleeb-e-Meer

 

1963

Ashar-e-Meer

 

1953

Ashar-e-Mir

 

1935

बा दरिया-ए-इश्क़

 

 

Bayan-e-Meer

 

2013

Deewan-e-Meer

 

 

दीवान-ए-मीर

खण्ड-001

 

Deewan-e-Meer

Nushkha-e-Mahmoodabad

1973

चित्र शायरी 20

वीडियो 36

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आबिदा परवीन

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आबिदा परवीन

Na socha na samjha na seekha na janaa

बेगम अख़्तर

Zia reads Mir Taqi Mir

Zia reads Mir Taqi Mir ज़िया मोहीउद्दीन

अश्क आँखों में कब नहीं आता

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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

बेगम अख़्तर

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

Urdu Studio

चलते हो तो चमन को चलिए कहते हैं कि बहाराँ है

मेहदी हसन

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ज़मर्रुद बानो

देख तो दिल कि जाँ से उठता है

मेहदी हसन

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है

भारती विश्वनाथन

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है

लता मंगेशकर

फ़क़ीराना आए सदा कर चले

सुरैया

मुँह तका ही करे है जिस तिस का

मेहदी हसन

मीरियात - दीवान नंo- 4, ग़ज़ल नंo- 1523

बेगम अख़्तर

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

पंकज उदास

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

सी एच आत्मा

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

सलीम रज़ा

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

छाया गांगुली

हस्ती अपनी हबाब की सी है

फ़रीदा ख़ानम

यारो मुझे मुआ'फ़ रखो मैं नशे में हूँ

ग़ुलाम अली

ऑडियो 47

इश्क़ में नय ख़ौफ़-ओ-ख़तर चाहिए

उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया

कुछ मौज-ए-हवा पेचाँ ऐ 'मीर' नज़र आई

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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