बातें करो

ग़ौस ख़ाह मख़ाह  हैदराबादी

बातें करो

ग़ौस ख़ाह मख़ाह हैदराबादी

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    रात-भर इक़रार की बातें करो

    सुब्ह-दम इंकार की बातें करो

    उलझनें दिल की बढ़ानी हों अगर

    गेसू-ए-ख़मदार की बातें करो

    हैं निगाहें सैर और अबरू कमाँ

    यार बा-हथियार की बातें करो

    मह-वशो इतने बुरे भी हम नहीं

    आओ हम से प्यार की बातें करो

    सिर्फ़ पहली ही के दिन दोस्तो

    साज़ और झंकार की बातें करो

    दूसरी को बच गए पैसे अगर

    कूचा-ओ-बाज़ार की बातें करो

    दस तलक चिल्लर अगर बाक़ी रहे

    चाय पर अख़बार की बातें करो

    बीस और इक्कीस को अहबाब से

    चर्ख़-ए-ना-हंजार की बातें करो

    क़र्ज़-ए-हसना ले के तुम उनतीस तक

    घर के कारोबार की बातें करो

    तीस को बातें करो इकतीस की

    या दिल-ए-बीमार की बातें करो

    आख़िरी दिन ख़ूब ग़ुस्से में रहो

    हुज्जत-ओ-तकरार की बातें करो

    फिर उसी शब सुब्ह की उम्मीद में

    मीठी मीठी प्यार की बातें करो

    तुम से ये किस ने कहा था 'ख़्वाह-मख़ाह'

    इस तरह बे-कार की बातें करो

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