लकीरें

आदिल हयात

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आदिल हयात

MORE BYआदिल हयात

    हथेली की लकीरों में

    मुक़द्दर क़ैद है

    उम्र-ए-रवाँ के बेशतर लम्हे

    जाने कौन सी आसूदगी की जुस्तुजू में

    कितने ही दरियाओं को इक रौ में पीछे छोड़ आए हैं

    मगर साहिल पे कर

    मेरे प्यासे होंट अब तक फड़फड़ाते हैं

    मिरी आँखों में भी नाकामियाँ ही रक़्स करती हैं

    मगर

    एहसास के तारीक आँगन में

    उमीदों की किरन सरगोशियाँ करती

    सुनाई जब भी देती हैं

    तो फिर से ताज़ा-दम हो कर

    मुक़द्दर से

    रिहाई की

    जसारत करने लगता हूँ

    स्रोत:

    • पुस्तक : Khayal Darya (Nazmein) (पृष्ठ 29)
    • रचनाकार : Adil Hayat
    • प्रकाशन : Arshia Publications (2013)
    • संस्करण : 2013

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