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अब्बास अली ख़ान बेखुद

1904 - 1969 | कोलकाता, भारत

किसी से इश्क़ करना और इस को बा-ख़बर करना

है अपने मतलब-ए-दुश्वार को दुश्वार-तर करना

हालत के तग़य्युर पर हो मातम-ए-माज़ी क्यूँ

इक वो भी ज़माना था इक ये भी ज़माना है

इन बुतों ने मुझ को बे-ख़ुद किस क़दर धोके दिए

सीधा-सादा जान कर मर्द-ए-मुसलमाँ देख कर

करते हैं अर्बाब-ए-दिल अंदाज़ा-ए-जोश-ए-बहार

मेरा दामन देख कर मेरा गरेबाँ देख कर

तवज्जोह चारा-गर की बाइस-ए-तकलीफ़ है 'बेख़ुद'

इज़ाफ़ा है मुसीबत में दवाओं का असर करना

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