Abdul Salam Bengluri's Photo'

अब्दुल सलाम बंगलौरी

1953 | भारत

ग़ज़ल 3

 

शेर 4

जो ये हिन्दोस्ताँ नहीं होता

तो ये उर्दू ज़बाँ नहीं होती

ईद का दिन है गले मिल लीजे

इख़्तिलाफ़ात हटा कर रखिए

शेर कहने की तबीअत रही

जिस से आमद थी वो सूरत रही

दिल की हालत बयाँ नहीं होती

ख़ामुशी जब ज़बाँ नहीं होती