अब्दुर रहमान जामी के शेर
क्यूँ न मैं नाज़ करूँ अपने क़बीले पे भला
क़ाफ़िला शाह-ए-हिरा का मिरे घर तक पहुँचा
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड
किसी के चेहरे पे अब तब्सिरा नहीं करता
मैं उस के हाथ में आईना दे के आया हूँ
-
शेयर कीजिए
- सुझाव
- प्रतिक्रिया
- डाउनलोड