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अब्दुस्समद ’तपिश’

लखमीनिया, भारत

ग़ज़ल 11

शेर 20

उसे खिलौनों से बढ़ कर है फ़िक्र रोटी की

हमारे दौर का बच्चा जनम से बूढ़ा है

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कोई कॉलम नहीं है हादसों पर

बचा कर आज का अख़बार रखना

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उन के लब पर मिरा गिला ही सही

याद करने का सिलसिला तो है

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पुस्तकें 2

Mata-e-Aainda

 

2000

Zakhmon Ke Silsile

 

1985

 

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