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आफ़ताब हुसैन

1962 | ऑस्ट्रिया

विख्यात पाकिस्तानी शायर, ऑस्ट्रिया में प्रवास, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में प्रतिष्ठित।

विख्यात पाकिस्तानी शायर, ऑस्ट्रिया में प्रवास, संजीदा शायरी पसंद करने वालों में प्रतिष्ठित।

ग़ज़ल

अपना दीवाना बना कर ले जाए

नोमान शौक़

अस्ल हालत का बयाँ ज़ाहिर के साँचों में नहीं

नोमान शौक़

कभी जो रास्ता हमवार करने लगता हूँ

नोमान शौक़

कमी रखता हूँ अपने काम की तकमील में

नोमान शौक़

कहाँ किसी पे ये एहसान करने वाला हूँ

नोमान शौक़

किसी तरह भी तो वो राह पर नहीं आया

नोमान शौक़

जब सफ़र से लौट कर आने की तय्यारी हुई

नोमान शौक़

तुम्हारे बाद रहा क्या है देखने के लिए

नोमान शौक़

देखे कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर के रंग भी

नोमान शौक़

मैं सोचता हूँ अगर इस तरफ़ वो आ जाता

नोमान शौक़

मक़ाम-ए-शौक़ से आगे भी इक रस्ता निकलता है

नोमान शौक़

ये जब्र भी है बहुत इख़्तियार करते हुए

नोमान शौक़

वो सर से पाँव तक है ग़ज़ब से भरा हुआ

नोमान शौक़

शब-ए-सियाह पे वा रौशनी का बाब तो हो

नोमान शौक़

हर फूल है हवाओं के रुख़ पर खिला हुआ

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI