Ahmad Ashfaq's Photo'

अहमद अशफ़ाक़

1969 | क़तर

अहमद अशफ़ाक़

ग़ज़ल 10

अशआर 11

चीख़ उठता है दफ़अतन किरदार

जब कोई शख़्स बद-गुमाँ हो जाए

फ़ासले ये सिमट नहीं सकते

अब परायों में कर शुमार मुझे

बिकता रहता सर-ए-बाज़ार कई क़िस्तों में

शुक्र है मेरे ख़ुदा ने मुझे शोहरत नहीं दी

मेरी कम-गोई पे जो तंज़ किया करते हैं

मेरी कम-गोई के अस्बाब से ना-वाक़िफ़ हैं

ये अलग बात कि तज्दीद-ए-तअल्लुक़ हुआ

पर उसे भूलना चाहूँ तो ज़माने लग जाएँ

पुस्तकें 3

 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

Jashn-e-Rekhta | 2-3-4 December 2022 - Major Dhyan Chand National Stadium, Near India Gate, New Delhi

GET YOUR FREE PASS
बोलिए