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अहमद ख़याल

1979

अहमद ख़याल

ग़ज़ल 27

अशआर 19

महकते फूल सितारे दमकता चाँद धनक

तिरे जमाल से कितनों ने इस्तिफ़ादा क्या

ये भी एजाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी

उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था

मैं था सदियों के सफ़र में 'अहमद'

और सदियों का सफ़र था मुझ में

ये भी तिरी शिकस्त नहीं है तो और क्या

जैसा तू चाहता था मैं वैसा नहीं बना

ऐन मुमकिन है कि बीनाई मुझे धोका दे

ये जो शबनम है शरारा भी तो हो सकता है

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI