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ऐश देहलवी

1779 - 1879 | दिल्ली, भारत

ग़ालिब की गज़लों के आलोचक

ग़ालिब की गज़लों के आलोचक

ग़ज़ल

आशिक़ों को ऐ फ़लक देवेगा तू आज़ार क्या

नोमान शौक़

क्या हुए आशिक़ उस शकर-लब के

नोमान शौक़

जुरअत ऐ दिल मय ओ मीना है वो ख़ुद-काम भी है

नोमान शौक़

जो होता आह तिरी आह-ए-बे-असर में असर

नोमान शौक़

फूल अल्लाह ने बनाए हैं महकने के लिए

नोमान शौक़

मैं बुरा ही सही भला न सही

नोमान शौक़

शोर अब आलम में है उस शोबदा-पर्दाज़ का

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI