ग़ज़ल

आँख में आँसू का और दिल में लहू का काल है

नोमान शौक़

घुटन अज़ाब-ए-बदन की न मेरी जान में ला

नोमान शौक़

जब सुब्ह की दहलीज़ पे बाज़ार लगेगा

नोमान शौक़

फ़ित्ने अजब तरह के समन-ज़ार से उठे

नोमान शौक़

बस इक तसलसुल-ए-तकरार-ए-क़ुर्ब-ओ-दूरी था

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI