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अख़्तर अमान

अख़्तर अमान के शेर

तमाम उम्र गुज़र जाती है कभी पल में

कभी तो एक ही लम्हा बसर नहीं होता

हमें हर आने वाला ज़ख़्म-ए-ताज़ा दे के जाता है

हमारे चाँद सूरज और सितारे एक जैसे हैं

बदन के शहर में आबाद इक दरिंदा है

अगरचे देखने में कितना ख़ुश-लिबास भी है