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aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair

jis ke hote hue hote the zamāne mere

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अख़्तर आसिफ़

1939 - 2008

अख़्तर आसिफ़ के शेर

आईना तो 'ऐबों की ख़बर देता है 'आसिफ़'

ख़ुश-फ़हमी-ए-इंसाँ का मगर कोई करे क्या

नहीं है मुझ को चमन से निकालना आसाँ

बशक्ल-ए-रंग रग-ए-गुल में बस गया हूँ मैं

जिस शख़्स को साए की है आज बड़ी चाहत

पूछो तो कभी उस ने पौदे भी लगाए हैं

आइना सच बोलता है आइना है मो'तबर

सच की 'आदत डाल तू भी मो'तबर हो जाएगा

मैं जियूँ एहसाँ बिठा कर वो भी इक कम-ज़र्फ़ का

ज़िंदगी प्यारी है लेकिन इस क़दर प्यारी नहीं

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