Akhtar Nazmi's Photo'

अख़्तर नज़्मी

1931 | ग्वालियर, भारत

अख़्तर नज़्मी के शेर

वो ज़हर देता तो सब की निगह में जाता

सो ये किया कि मुझे वक़्त पे दवाएँ दीं

अब नहीं लौट के आने वाला

घर खुला छोड़ के जाने वाला

मिरी तरफ़ से तो टूटा नहीं कोई रिश्ता

किसी ने तोड़ दिया ए'तिबार टूट गया

नाव काग़ज़ की छोड़ दी मैं ने

अब समुंदर की ज़िम्मेदारी है