Amit Sharma Meet's Photo'

अमित शर्मा मीत

1989 | बरेली, भारत

ग़ज़ल 22

शेर 22

कई दिन से शरारत ही नहीं की

मिरे अंदर का बच्चा लापता है

मैं जितनी और पीता जा रहा हूँ

नशा उतना उतरता जा रहा है

मैं कहानी में नया मोड़ भी ला सकता था

मैं ने किरदार को आँसू में भिगोया ही नहीं

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