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अनीस अहमद अनीस

1940

अनीस अहमद अनीस

ग़ज़ल 7

नज़्म 1

 

अशआर 9

अब ग़म का कोई ग़म ख़ुशी की ख़ुशी मुझे

आख़िर को रास ही गई ज़िंदगी मुझे

गवारा ही थी जिन को जुदाई मेरी दम-भर की

उन्हीं से आज मेरी शक्ल पहचानी नहीं जाती

कभी इक बार हौले से पुकारा था मुझे तुम ने

किसी की मुझ से अब आवाज़ पहचानी नहीं जाती

तवाफ़-ए-माह करना और ख़ला में साँस लेना क्या

भरोसा जब नहीं इंसान को इंसान के दिल पर

यारब मिरे गुनाह क्या और एहतिसाब क्या

कुछ दी नहीं है ख़िज़्र सी उम्र-ए-रवाँ मुझे

पुस्तकें 1

 

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI

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