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Ankit Maurya's Photo'

अंकित मौर्या

2001 | आरा, भारत

अंकित मौर्या के शेर

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बताया है किसी के इश्क़ ने हम को

कि दुनिया ख़ूबसूरत भी हो सकती है

वो ग़ुस्से में सीधी बात नहीं करता

तूफ़ानों में बारिश तिरछी होती है

बाँट डाले ऐसे हम ने दिल के टुकड़े काट कर

जन्म दिन पे बाँटते हैं केक जैसे काट कर

रोक भी तो हम नहीं सकते थे जाने वाले को

बाद उस के दिल किसी से भी लगाया गया

इस लिए आने नहीं देता किसी को दिल में

टूटे घर में जो भी आता है चला जाता है

जाने कैसे सब मिटा देते हैं दिल से यादों को

हम से फोटो वॉल-पेपर से हटाया गया

जान तेरी बातों को रखता था मैं सर आँखों पे

और तुम से फ़ोन तक मेरा उठाया गया

एक दिन यूँ ही लगा मुझ को गिनाने ऐब मेरे

वो भला किस मुँह से कहता छोड़ जाना चाहता है

इक पेड़ की तरह मैं किनारे खड़ा रहा

इक रेल की तरह वो गुज़रता चला गया

मैं किसी को दूँ जगह थोड़ी सी जो दिल में अगर

वो मिरे दिल को दुखाता है चला जाता है

ज़िंदगी से ऐसे काटा सीन उस ने इश्क़ का

देखता है कोई जैसे फ़िल्म गाने काट कर

मेरे आग़ोश में आता है चला जाता है

रोज़ शब ख़्वाब दिखाता है चला जाता है

कर के लाखों कोशिशें गर जो बचा भी लूँ मैं रिश्ता

तो नहीं फिर मन हमारा पहले के जैसा मिलेगा

कोई ले ले फ़ौरन उस के हाथ से ग़ुब्बारे सारे

एक बच्चा जाने कब से मुस्कुराना चाहता है

इश्क़ जिस में ना बिछड़ने का ज़रा भी डर रहे

खेलना है खेल पर साँपों के ख़ाने काट कर

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