ए.आर.ख़ातून देहलवी का परिचय
पहचान: लोकप्रिय उपन्यासकार, घरेलू और सामाजिक जीवन की प्रतिनिधि तथा सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों की संवेदनशील चित्रकार
ए. आर. खातून, जिनका वास्तविक नाम उम्मतुर्रहमान था, 1900 में दिल्ली, ब्रिटिश भारत में पैदा हुईं। बचपन से ही उन्हें पढ़ने-लिखने का गहरा शौक था। घरेलू वातावरण में रहते हुए उन्होंने अपनी शिक्षा पूरी की और अपने साहित्यिक स्वाद को विकसित किया। प्रारंभ में उनके लेख प्रसिद्ध साहित्यिक पत्रिका ‘इस्मत’ में प्रकाशित होते रहे, जहां से उनकी साहित्यिक पहचान बननी शुरू हुई।
ए. आर. खातून ने 1929 में अपना पहला उपन्यास ‘शमा’ लिखा, जिसे अपने आकर्षक शैली और भावनात्मक वातावरण के कारण असाधारण लोकप्रियता मिली। इस सफलता के बाद उन्होंने उपन्यास लेखन को अपनी स्थायी साहित्यिक पहचान बना लिया। ‘तस्वीर’ उनका दूसरा महत्वपूर्ण उपन्यास था, जिसे पाठकों ने बेहद पसंद किया। इसके बाद ‘अफ़्शाँ’, ‘फाकेहा’, ‘चश्मा’, ‘हाला’, ‘रुमाना’, ‘फ़रहाना’, ‘ज़ेवर’ और ‘अस्मा’ जैसे उपन्यास प्रकाशित हुए और उर्दू के लोकप्रिय उपन्यासों में शामिल हो गए। उनके उपन्यास विशेष रूप से महिला पाठकों में अत्यधिक लोकप्रिय रहे और लंबे समय तक शौक से पढ़े जाते रहे।
ए. आर. खातून के उपन्यासों में घरेलू जीवन, पूर्वी मूल्य, पारिवारिक संबंध और भारतीय उपमहाद्वीप के मुस्लिम समाज की सांस्कृतिक और नैतिक स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनके यहां चरित्र चित्रण और कथा शैली में एक विशेष निरंतरता मिलती है, लेकिन उनकी असली ताकत सामाजिक जीवन की बदलती तस्वीरों को भावनात्मक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करना है। उनकी रचनाओं में स्त्री के भावनात्मक संसार, घरेलू संघर्ष, परंपरा और आधुनिकता के टकराव तथा नैतिक मूल्यों के पतन और संरक्षण जैसे विषय प्रमुख हैं।
भारत विभाजन के बाद ए. आर. खातून पाकिस्तान चली गईं और वहीं अपनी साहित्यिक गतिविधियां जारी रखीं। उनके कई उपन्यास पाकिस्तान टेलीविज़न पर धारावाहिक रूप में प्रस्तुत किए गए, जिनमें ‘अफ़्शाँ’, ‘तस्वीर’ और ‘शमा’ को विशेष लोकप्रियता मिली। इन उपन्यासों का नाट्य रूपांतरण प्रसिद्ध लेखिका फ़ातिमा सुरैया बजिया ने किया, जिसके बाद उनकी लोकप्रियता और बढ़ गई तथा नई पीढ़ी भी उनकी रचनाओं से परिचित हुई।
निधन: ए. आर. खातून का निधन 24 फ़रवरी 1965 को लाहौर में हुआ।