Arshi Bhopali's Photo'

अर्शी भोपाली

1921 - 1977 | भोपाल, भारत

अर्शी भोपाली के शेर

निगाह-ए-नाज़ की मासूमियत अरे तौबा

जो हम फ़रेब खाते तो और क्या करते

बहुत अज़ीज़ क्यूँ हो कि दर्द है तेरा

ये दर्द बढ़ के रहा इज़्तिराब हो के रहा

हमें तो अपनी तबाही की दाद भी मिली

तिरी नवाज़िश-ए-बेजा का क्या गिला करते

मौक़ूफ़ फ़स्ल-ए-गुल पे नहीं रौनक़-ए-चमन

नज़रें जवान हों तो ख़िज़ाँ भी बहार है

हम तो आवारा-ए-सहरा हैं हमें क्या मतलब

उन की महफ़िल में जुनूँ की कोई तौक़ीर सही

अजीब चीज़ है ये शौक़-ए-आरज़ू-मंदी

हयात मिट के रही दिल ख़राब हो के रहा