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असग़र गोंडवी

1884 - 1936 | गोण्डा, भारत

प्रख्यात पूर्व-आधुनिक शायर, अपने सूफ़ियाना लहजे के लिए प्रसिद्ध।

प्रख्यात पूर्व-आधुनिक शायर, अपने सूफ़ियाना लहजे के लिए प्रसिद्ध।

ग़ज़ल

आलाम-ए-रोज़गार को आसाँ बना दिया

नोमान शौक़

आशोब-ए-हुस्न की भी कोई दास्ताँ रहे

नोमान शौक़

इक आलम-ए-हैरत है फ़ना है न बक़ा है

नोमान शौक़

एक ऐसी भी तजल्ली आज मय-ख़ाने में है

नोमान शौक़

कोई महमिल-नशीं क्यूँ शाद या नाशाद होता है

नोमान शौक़

कौन था उस के हवा-ख़्वाहों में जो शामिल न था

नोमान शौक़

जान-ए-नशात हुस्न की दुनिया कहें जिसे

नोमान शौक़

जो नक़्श है हस्ती का धोका नज़र आता है

नोमान शौक़

ज़ौक़-ए-सरमस्ती को महव-ए-रू-ए-जानाँ कर दिया

नोमान शौक़

तिरे जल्वों के आगे हिम्मत-ए-शरह-ओ-बयाँ रख दी

नोमान शौक़

न खुले उक़्दा-हा-ए-नाज़-ओ-नियाज़

नोमान शौक़

पाता नहीं जो लज़्ज़त-ए-आह-ए-सहर को मैं

नोमान शौक़

मस्ती में फ़रोग़-ए-रुख़-ए-जानाँ नहीं देखा

नोमान शौक़

ये इश्क़ ने देखा है ये अक़्ल से पिन्हाँ है

नोमान शौक़

यूँ न मायूस हो ऐ शोरिश-ए-नाकाम अभी

नोमान शौक़

रक़्स-ए-मस्ती देखते जोश-ए-तमन्ना देखते

नोमान शौक़

शिकवा न चाहिए कि तक़ाज़ा न चाहिए

नोमान शौक़

है दिल-ए-नाकाम-ए-आशिक़ में तुम्हारी याद भी

नोमान शौक़

गुम कर दिया है दीद ने यूँ सर-ब-सर मुझे

ख़ालिद मुबश्शिर

ये नंग-ए-आशिक़ी है सूद ओ हासिल देखने वाले

ख़ालिद मुबश्शिर

शेर

इश्वों की है न उस निगह-ए-फ़ित्ना-ज़ा की है

नोमान शौक़

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI