Khalid Mubashshir's Photo'

ख़ालिद मुबश्शिर

1980 | दिल्ली, भारत

ग़ज़ल 14

शेर 8

मुझे शक है होने होने पे 'ख़ालिद'

अगर हूँ तो अपना पता चाहता हूँ

मिरी वहशतों का सबब कौन समझे

कि मैं गुम-शुदा क़ाफ़िला चाहता हूँ

कहीं राँझा, कहीं मजनूँ हुआ

वजूद-ए-इश्क़ आलमगीर है

दश्त-ए-जुनूँ से गए शहर-ए-ख़िरद में हम

दिल को मगर ये सानेहा अच्छा नहीं लगा

टपक के दीदा-ए-नम से सदाएँ देता है

जो एक हर्फ़-ए-तमन्ना दिल-ए-तबाह में था

संबंधित ब्लॉग

 

संबंधित शायर

  • शहराम सर्मदी शहराम सर्मदी समकालीन
  • सरफ़राज़ ख़ालिद सरफ़राज़ ख़ालिद समकालीन
  • ख़ालिद महमूद ख़ालिद महमूद गुरु
  • ओसामा ज़ाकिर ओसामा ज़ाकिर समकालीन
  • सालिम सलीम सालिम सलीम समकालीन

"दिल्ली" के और शायर

  • मिर्ज़ा ग़ालिब मिर्ज़ा ग़ालिब
  • फ़रहत एहसास फ़रहत एहसास
  • शैख़  ज़हूरूद्दीन हातिम शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम
  • शाह नसीर शाह नसीर
  • इंशा अल्लाह ख़ान इंशा इंशा अल्लाह ख़ान इंशा
  • आबरू शाह मुबारक आबरू शाह मुबारक
  • शेख़ इब्राहीम ज़ौक़ शेख़ इब्राहीम ज़ौक़
  • हसरत मोहानी हसरत मोहानी
  • बहादुर शाह ज़फ़र बहादुर शाह ज़फ़र
  • बेख़ुद देहलवी बेख़ुद देहलवी