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अशफ़ाक़ हुसैन

1951 | कनाडा

कनाडा में प्रवासी उर्दू के मशहूर शायर

कनाडा में प्रवासी उर्दू के मशहूर शायर

ग़ज़ल 42

नज़्म 8

शेर 15

फूल महकेंगे यूँही चाँद यूँही चमकेगा

तेरे होते हुए मंज़र को हसीं रहना है

दिल की जागीर में मेरा भी कोई हिस्सा रख

मैं भी तेरा हूँ मुझे भी तो कहीं रहना है

तुम्हें मनाने का मुझ को ख़याल क्या आए

कि अपने आप से रूठा हुआ तो मैं भी हूँ

पुस्तकें 41

Aashiyan Gum Karda

 

2009

Ek Hatheli Pe Gulab

 

2017

फैज़ : एक जाएज़ा

 

2001

Faiz : Ek Jaeza

 

1978

फ़ैज़ : हबीब-ए-अम्बर दस्त

 

2011

फैज़ : शख़्सियत और फ़न

 

2011

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़: शख़्सियत और फ़न

 

2006

फ़ैज़ एक जाएज़ा

 

1977

फ़ैज़ हबीब-ए-अम्बर दस्त

 

1992

फैज़ के मग़रिबी हवाले

 

2011

वीडियो 9

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वीडियो का सेक्शन
शायर अपना कलाम पढ़ते हुए
Dil ik nai dunya e Maani se mila hai

अशफ़ाक़ हुसैन

Girti hai to gir jaye ye deewar e Sukoon bhi

अशफ़ाक़ हुसैन

Itna be nafa nahi usse bichadna mera

अशफ़ाक़ हुसैन

Tere pehlu me tere dil ke qareen rehna hai

अशफ़ाक़ हुसैन

Tere pehlu mein tere dil ke qareen rehna hai

Ashfaq Hussain reciting his Ghazal & Nazm at Jashn-e-Rekhta-2015. अशफ़ाक़ हुसैन

Yahi kahi koi awaz de raha tha mujhe

अशफ़ाक़ हुसैन

ज़ूमिंग

देखूँ जो आसमाँ से तो इतनी बड़ी ज़मीं अशफ़ाक़ हुसैन

ये दिल भी तो डूबेगा समुंदर में किसी के

अशफ़ाक़ हुसैन

ऑडियो 14

इतना बे-नफ़अ नहीं उस से बिछड़ना मेरा

गिरती है तो गिर जाए ये दीवार-ए-सुकूँ भी

ज़रा ज़रा ही सही आश्ना तो मैं भी हूँ

Recitation

aah ko chahiye ek umr asar hote tak SHAMSUR RAHMAN FARUQI