ग़ज़ल 1

 

शेर 11

हुसैन आज भी क़ाएम है अपनी सूरत पर

यज़ीद चेहरे बदलता है हर ज़माने में

  • शेयर कीजिए

दोस्त-दारी के सलीक़े से बहुत वाक़िफ़ हूँ

अब मुझे हाथ मिलाने का हुनर आता है

  • शेयर कीजिए

तुझे छू कर मुझे कैसा लगेगा

हवा के हाथ बन कर सोचता हूँ

  • शेयर कीजिए

आग पानी भी कभी एक हुए देखे हैं

आतिश-ए-ज़ब्त लहू में भी नहीं हल होगी

  • शेयर कीजिए

हमारा जिस्म तो फिर जिस्म ठहरा

दराड़ें ऐब हैं दीवार में भी

  • शेयर कीजिए

"गुजर ख़ान" के और शायर

  • सय्यद जावेद सय्यद जावेद
  • Shiraz Akhtar Mughal Shiraz Akhtar Mughal
  • अहमद वक़ास महरवी अहमद वक़ास महरवी